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ANISH

खुद की खोज में निकला, जिंदगी के मंज़र निहारता, जिंदगी की गहराईयों में, अपना असल तलाशता।

“Embarked on a quest to find myself, observing life’s varied scenes. In the depths of life, searching for my own reflection.”
~ Anish

HAQIQAT

CATEGORY · Khwab

रात की स्याही में उजाले की बातें

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Anish /

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Khwab /

March 03, 2024

अंधेरों की छाँव में, जब ख्वाब उजाला बन जाए, उन आँखों की यादों में, हर रात सवेरा कहलाए। जब रात के सन्नाटे में, कुछ भीगे अल्फाज़ों की बात हो, उसकी मेरी खामोशी में, जज़्बात-ए-ग़ज़ल की आवाज़ हो। ख्वाब अधूरे हैं भी अब, ...
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रात और उम्मीदें

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March 03, 2024

रात और उम्मीदें रात की इस वीरानियों में, उम्मीदों के चिराग जलाए हैं, अंधेरों के साये में भी, खुद को खोज कर लाए हैं। मुझमें किसी और का अक्स हो, ये मशवरा अक्सर लोग देते आए हैं, खुद में तलाशा मैंने हर अक्स को, पर वो म...
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ख्वाबों की दुनिया

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March 03, 2024

वो अलग ख्वाब था, जो कभी मैं देखता था, लोगों के आम तजुर्बे से अलग, वो रोशनी खुद में समेटता था। उस ख्वाब की बारिश के, हर बूँद में रंग बिखरा था, मुहल्ले की गलियों और मैदानों को, जब मोबाइल ने ना छीना था। मनचाहा चला था ...
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गूंज

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March 03, 2024

अनकही सी आरज़ू, गूँज जो गवाह न हो, खामोशी की गहराई में, जो कहा वो सुना न हो। ज़िंदगी के आईने में, अक्सर लोगों ने रंग बदला है, जब भी मैं गिरते गिरते संभला, लोगों के लिए वो मसला है। तलाश कैसी है वो पता नहीं, ढूँढा बह...
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तमन्नाओं का आसमान

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March 03, 2024

ये ख्वाब ख्वाब तमन्ना, और इन आँखों के ये दबे सवाल, अंजाना सा ये रास्ता, ये आरज़ू और ये खयाल। ख्यालों से मंजिलों के बीच, लकीर कोई तू तबियत से खींच, लकीरों में जीत और हार के बीच, हौसला है तो इज़ाम को खून से सींच। ना...
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